Skip to main content

Featured post

Business idea for low investment,Business ideas for less educated people

Business Ideas in Hindi
कोई भी अनपढ़ या कम पढ़ा लिखा व्यक्ति इन 5 व्यवसायों को शुरू करके कर सकता है अच्छी खासी मोटी 
दुनिया में कई ऐसे लोग होते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण वे शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते हैं. वैसे तो ये पहले के समय में ज्यादा होता था, किन्तु आज भी बहुत से लोग हैं जो शिक्षा प्राप्त करने में असमर्थ हैं. इसका मुख्य कारण पैसे की कमी के साथ – साथ साधन की कमी और कम पढ़े लिखे लोगों वाली पृष्ठभूमि का होना है. ये खास तौर पर छोटे शहर या गांव में रहने वाले लोग होते हैं, जोकि अनपढ़ रह जाते हैं. यदि आप ऐसे लोगों को जानते हैं जोकि अनपढ़ है या कम पढ़े लिखे है, और इस वजह से उनके पास कोई कमाई का साधन नहीं है. तो उन्हें आप कुछ पैसे कमाने वाले बिज़नेस के आइडियाज दे सकते हैं. जिसे वे अपनी अजीविका का साधन बना सकें. ऐसे लोगों के लिए कुछ बिज़नेस आइडियाज हम भी यहाँ दे रहे हैं, इसे अंत तक पढ़िये. 
कम पढ़े लिखे लोगों के लिए व्यवसाय के आइडियाज (Less Educated Business Ideas)
कम पढ़ें लिखे लोग या फिर जो अनपढ़ हैं उन्हें आप निम्नलिखित व्यवसाय शुरू करने की टिप्स दे सकते हैं. और यदि आ…

Raksha Bandhanरक्षाबंधन

                             raksha bandhan

          Raksha Bandhan

                     
raksha bandhan

भारतीय संस्कृति में हर दिन ही एक उत्सव है उससे कोई न कोई पर्व अवश्य जुड़ा रहता है । जीवन में उत्साह उल्लास बनाये रखने के लिये पर्वो की महत्वपूर्ण भूमिका है । इन पर्वो से जुड़ी अनेकों पौराणिक तथा दंत कथायें हैं जिनके माध्यम से एक सकारात्मक प्रयोजन की सृष्टि की गई है । इन कथाओं के कथानक यद्यपि काल्पनिक चमत्कारिक तथा बड़े ही तिलस्माती अंदाज में व्यक्त हुए हैं , परन्तु उपसंहार में किसी उच्च शाश्वत मूल्य की स्थापना भी की गई है ।raksha bandhan 2020  अगर इन महीनों को हम हिन्दी महीनों में व्यक्त करें तो यह माह आषाढ़ , सावन , भादो कहलायेगें ।

                         
raksha bandhan
निम्न तालिका द्वारा यदि हम स्पष्ट करें तो इन महीनों में निम्न पर्व पड़ेगें । उपरोक्त तालिका से स्पष्ट है कि हिन्दू समाज में प्रतिदिन ही उत्सव हैं । वैसे उपरि वर्णित त्यौहार अलग - अलग क्षेत्र में विशेष महत्व रखते हैं ।

 आधुनिक समाज को इन , बहुत से पर्वो के बारे में जानकारी भी नहीं है । यहाँ पर इन सबके बारे में जानकारी देना , मनाने की विधि पर्व से संबंधित लोक कथाओं के उल्लेख द्वारा इनके महत्व को बता पाना स्थानाभाव के कारण संभव दिखायी नहीं देता । अतः मनाये जाने वाले पर्व रक्षाबंधन के महत्व उससे संबंधित पौराणिक कथा तथा उसके स्वरूप की चर्चा करूँगा ।

raksha bandhan

raksha bandhan banane ka tarika यह पर्व श्रावण शुक्ल पक्ष पूर्णमासी को मनाया जाता है इस त्यौहार पर बहने अपने भाइयों की कलाई पर राखी ( रक्षा सूत्र ) बाँधती हैं तथा भाइयों का मुंह मीठा करती हैं  भाई इसके बदले बहन की रक्षा करने का वचन देता है ।raksha bandhan festival प्राचीन काल में इस दिन इस अवसर पर ब्राम्हा " वर्ण के लोग सूबाँधा करते थे ।

 रक्षा सूत्र बाँध असम में उन्हें अपने यजमान द्वारा दान दलणाप्त होता था । वर्ण व्यवस्था क्रम में क्षत्रियों का  त्यौहार दशहरा वैश्यों का दीपावली तथा शूद्रों का पर्व होली निर्धारित हुआ था । समाज में समरसता लाने के लिये हिन्दुओं के इन पर्वो को समाज का हर वर्ग उत्साह के साथ मनाने लगा । इस त्यौहार को मनाने के संबंध में प्रकारान्तर से ईवर्ण व्यवस्था कम में क्षत्रियों का त्यौहार दशहरा वैश्यों का दीपावली तथा शूद्रों का पर्व होली निर्धारित हुआ था । समाज में समरसता लाने के लिये हिन्दुओं के इन पर्वो को समाज का हर वर्ग उत्साह के साथ मनाने लगा ।

why make raksha bandhan? इस त्यौहार को मनाने के संबंध में प्रकारान्तर से कई पौराणिक तथा लोक कथायें प्रचलित हैं । पहली कथा भगवान इंद्र की है । देवता तथा दैत्यों के बीच घोर संग्राम चल रहा था । दैत्य लोग दुर्जेय थे तथा देवताओं पर वे कुछ भारी पड़ रहे थे उनको प्रभावी जानकर इन्द्र की धड़कन बढ़ी हुई थी । परिणाम स्वरूप पति को विशेष चिन्तित देख पत्नी इन्द्राणी ( शची ) ने इन्द्र की दाहिनी कलाई में अभिमंत्रित करके एक रक्षा सूत्र बाँधा तथा विश्वास दिलाया कि जब तक वह रक्षा सूत्र उनके हाथ में बँधा होगा तब तक उनकी जीवन हानि किसी भी तरह हो ही नहीं सकती ।

 जिसके कारण इन्द्र की दैत्यों के युद्ध में बड़ी विजय प्राप्त हुयी । रक्षा सूत्र इसी दिन श्रावण पूर्णिमा को बॉधा गया था , इसके उपरान्त परम्परा में रक्षा बंधन पर्व के रूप में मनाया जाने लगा । - पौराणिक कथा श्रीमद भागवत गण में आती है जिसमें भगवान विष्णु ने इन्द्र की रक्षा तथा उनका साम्राज्य बचाने के लिए वामन अवतार लिया था तथा राजा बलि को छला था । कथानक इस प्रकार है कि एक बार राजा बलि देवताओं द्वारा समाप्त हो जाने के बाद , दैत्य गुरू शुक्राचार्य ने अपनी संजीवनी विद्या द्वारा बलि महाराजको पुनर्जीवित कर दिया ।

 इस पर बलि ने कृत कृत्य होकर गुरू देव शुक्राचार्य का अत्यन्त आभार माना तथा कृतज्ञता में उसने अपने गुरूदेव के चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया और वचन दिया कि वह आपके आदेश के अनुसार समस्त कार्य एवं योजना कार्यान्वित करेगा । शुक्राचार्य ने उसे नीति युद्ध कौशल रणनीति में खूब निपुण कर दिया धीरे - धीरे उसका यशोबल चारों ओर दिग दिगंत में बढ़ता गया ।

उसने देवताओ पर  विजय प्राप्त करने की उसने खूब तैयारी कर ली उसके बढ़ते हुये प्रभाव को देखकर इन्द्र देव गुरू वृहस्पति के पास गये , वृहस्पति ने उन्हें विष्णु जी की अनुनय करने के लिये देवताओं पर कहा । इन्द्र की विनय को मानकर भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया तथा ब्राम्हण वेष धारण किया ।

 राजा बलि ने अनेकों अश्वमेघ यज्ञ किये यज्ञ के उपरान्त वह ब्राम्हणों को इच्छित दान दक्षिणा दिया करता था ।राजा बलि ने अश्वमेघ यज्ञ किया इसी बीच भगवान विष्णु वामन ( बॉवन अंगुल के ) अवतार में उनके सम्मुख प्रस्तुत हुये उन्होंने बलि से कहा महराज यज्ञादि कर्म बिना विप्र सेवा दान दक्षिणा के निष्फल होते हैं । इस पर बलि ने विप्र वेशधारी भगवान वामन को विश्वास दिलाया कि वे इछित वर की याचना करें । इस पर वामन ने कहा कि मुझे तो तीन पग धरती ही चाहिये ब्राम्हण को लोभी नहीं होना चाहिये राजा बलि बोले महराज मैं आपको द्वीप समूह दे सकता हूँ , यह क्या तीन पग धरती चाहिये वामन की चतुराई तथा रूप को देखकर दैत्य गुरू शुकाचार्य यह समझ गये थे कि ब्राह्मण वेशधारी वामन रूप साक्षात परम ब्रह्म लोकाधिपति विष्णु हैं , अतः उन्होंने बलि को संकल्प में दान न देने के लिये जोर देकर आदेश दिया परन्तु बलि ने उसे अनसुना कर दिया ।

 परिणामतः शुक्राचार्य नाराज होकर चिल्लाते रहे अंत में बलि को शाप भी दे दिया । परन्तु बलि अपनी ॥ दानशीलता सत्यनिष्ठा से बिल्कुल नहीं डिगा ।  उसने तीन पग धरती देने का संकल्प ले लिया । इसके बाद भगवान वामन ने अपना विशाल रूप प्रकट किया ।

 वह इतना विराट हो गये प्रथम पग में धरती भर में छा गये तथा समस्त भू लोक को नाप लिया तथा दूसरे पग में आकाश लोक नाप लिया तीसरे पग को मैं कहाँ रखू । ऐसा उन्होंने राजा बलि से कहा । इस पर बलि ने निरीह भाव से कहा महराजआप अपने यह शरीर भी आपका ही है । चरणों को मेरे शीश पर रख दीजिये असत भगवान को वैसा ही करना पड़ा । बलि हार कर भी जीत गया था . भगवान जीतकर भी हारे थे उसकी दानशीलता सत्य निष्ठा वचन बद्धता से भगवान अभिभूत थे उन्होंने बलि से इस प्रतिदान के बदले इच्छित वर मांगने का आग्रह किया । इस पर बलि ने यह वर माँगा कि वह जिधर भी दृष्टि डाले . उधर उसे भगवान विष्णु का दर्शन हो ।

 उसके इस प्रस्ताव को भगवान ने मान लिया । अत उसकी निगरानी के लिये भगवान को चौबीसों घटो का समय चौकीदारी के लिये लगाना पड़ गया । इधर स्वर्ग लोक में भगवान की अनुपस्थिति से माता लक्ष्मी अत्यन्त दुःखी हुई । मुनि नारद से उन्होंने अपना दुख व्यक्त किया तब नारद जी ने उन्हें बताया कि भगवान इस समय सुतल लोक ( पाताल लोक ) में बलि की रखवाली कर रहे है उनको छुडाने का एक उपाय है माता लक्ष्मी ने व्यग्र होकर कहा  ऋषिवर वह उपाय कौन सा है । नारद जी ने उन्हें बताया वे महाराजा बलि को अपना भाई बनाने का आग्रह करें ।

 माता लक्ष्मी बलि के दरवार में गयीं दिन भी यह रक्षा बंधन का पर्व था , अतः राजा बलि से उन्होंने अपना भाई बनाने का आग्रह किया बलि के तथास्तु स्वीकार कर लेने पर माता लक्ष्मी ने बलि के . हाँथ में रक्षा सूत्र बाँध दिया । बलि ने परिणाम स्वरूप माता लक्ष्मी की रक्षा करने का वचन दिया । उसके इस प्रकार रक्षा का भार लेने पर माता लक्ष्मी ने कहा कि उनकी किस प्रकार रक्षा हो सकती है जब उनके पति उनके पास नहीं रह पाते । कारण पूँछने पर उन्होंने बताया कि ये जो आपके द्वारपाल है यही तो उनके पति है 

 ।raksha bandhan gifts for sister महराज बलि को सारा रहस्य प्रकट हो गया और उसने कहा कि जब साक्षात परम ब    ही उनका याचक हो तो इससे बड़ा वैभव और कौनसा हो सकता अतः उसने प्रसन्नता पूर्वक भगवान को मुक्त कर दिया 

raksha bandhan gifts for sister
raksha bandhan
। राखी के स्यौहार को कही - वाली- बलेवा भी कहते  है । इसका मतलब  है (भगवान विष्णु की प्रति राजा बलि की रानी भक्ति)raksha bandhan essay रक्षाबंधन का त्यौहार भाई बहन के हार्दिक स्नेह का अटूट  बंधन  बनाये रखने की श्रेष्ठ परंपरा है । माॅ- बाप के चले जाने के बाद भाई से मायका चलता है ।

Comments

Popular posts from this blog

Personality development। पर्सनालिटी डेवलपमेंट हिन्दी में

Personality development पर्सनालिटी डेवलपमेंटक्या आप ऐसे लोगों को जानते हो जो अगर कहीं किसी भी काम से हमारे बीच आ जाते हैं जिन्हें देखकर बात करके हमें बहुत ही अच्छा लगता है ।हम क्या बल्कि सभी लोग उनके पास  खिचे चले आते हैं । क्या आप उनका सीक्रेट जाना चाहोगे उनकी अट्रैक्टिव पर्सनालिटी के  बारे में उनमें लोगों को कुछ और दिखता है। यह कुछ और नहीं है उनकी इनर सेल्फ रिफ्लेक्शन भी है । हममें से हर कोई ऐसी Pesanolity Devlopmentकरने की क्षमता रखते हैं।  इसके लिए हमें हर एक स्किल सीखना होगा जो हमें इस आर्ट को सीखने में माहिर करेगा।                  तो चलिए आज हम सीखेंगे सही रास्ते जिससे कि हर कोई एक ग्रेट पर्सनालिटी डेवलप कर सकता है। चाहे हम आप एक इंट्रोवर्ट गर्ल हो या फिर आप मे कॉन्फिडेंस की कमी हो, जब तक इस आर्ट में आप माहिर नहीं बन जाते तब तक आप आसानी से अपनी प्रैक्टिस जारी रख  सकते हैं ।इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसी टिप्स  और ट्रिक्स बताएंगे जिससे आप एक अमेजिंग पर्सनालिटी डेवलप कर सकते हैं ।1  अपनी भीतरी सुंदरता के लिए कार्य  (WORK ON YOUR INNER BEUTY)      हम आपकी बाहरी सुन्दरता पर ज्यादा…

Father of New Clear Energy biography Dr.HOMEO JAHANGIR BHABHA

" Dr.HOMEO JAHANGEER BHABHA""मेरी सफलता इस  बात पर निर्भर नहीं  करती कि कोई मेरे बारे मे क्या सोचेगा ,  मेरी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि मैं क्या कर सकता हूँ  ।।                                                   
  Birth date: 30 October 1909                     
Deth 24 Janauray1966 Mont blanc 
Dr Homeo j Bhabha


      भारत दुनिया के उन 9 देशों में से एक है जिसके पास न्यूक्लियर पावर है।                              भारत में न्यूक्लियर पावर के रिजल्ट के नाम से जानते हैं इनका नाम तो आपने सुना ही होगा।आज हम बात करेंगे  प्रसिद्ध वैज्ञानिक डाक्टर होमी जहांगीर भाभा की उनकी उपलब्धियों और भारत के परमाणु विकास में उनके योगदान की जिन्हें फादर ऑफ इंडियन न्यूक्लियर प्रोग्राम यानि भारतीय परमाणु कार्यक्रम का जनक भी कहा जाता है।

जिन्होने दो प्रसिद्ध शोध संस्थानों की नींव 1945मे रखी है-          (T.I.F.R)टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च और दूसरी है।जिसका नाम बदलकर ऑटोमिक रिसर्च सेंटर रख दिया गया था तो चलिए दोस्तों आज उनके के बारे में शुरू से जानते हैं। होमी जहाँगीर भाभा का जन्म 30…

Biography of lord Buddha,Buddha quots?

गौतम बुद्ध का त्याग Sacrifice of Gautama Buddha Biography Lord Buddha
Birth of Buddha?जन्म तिथि 563 ई० जन्म स्थानलुंबिनी, नेपाल

 वास्तविक नाम      
सिद्धार्थ वशिष्ठ उपनाम गौतम बुद्ध, सिद्धार्थ गौतम, शाक्या मुनि, बुद्धाव्यवसायबौद्ध धर्म के संस्थापक
व्यक्तिगत जीवन

Death of Buddha?


मृत्यु तिथि 483 ई०मृत्यु स्थलकुशीनगर, भारतआयु (मृत्यु के समय)
80 वर्ष
गृह नगरलुंबिनी, नेपालधर्मबौद्ध धर्म जाति क्षत्रिय (शाक्य)परिवार 



Who was lord Buddha father?पिता - शुद्धोधन
माता - मायादेवी, महाप्रजावती उर्फ़ गौतमी (सौतेली माँ)
प्रेम संबन्ध एवं अन्य जानकारियां
वैवाहिक स्थिति
विवाहित पत्नी राजकुमारी यशोधरा
29 साल की उम्र में, सिद्धार्थ ने अपने महल  और परिवार को, एक सन्यासी जीवन जीने के लिए त्याग दिया, उन्होंने सोचा कि गृह त्याग  का जीवन जीने से, उन्हें वहजवाब मिलेगा जो वह तलाश कर रहे थे। अगले छह सालों तक उन्होंने और अधिक तपस्वी जीवन जिया। उस दौरान उन्होंने बहुत कम खाना खाया और उपवास करने के कारण शरीर बहुत ही दुर्बल और कमजोर हो गया था।
इन वर्षों में उन्होंने पांच अनुयायी भी मिले , जिनके साथ उन्होंने कठोर तपस्य…