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Business idea for low investment,Business ideas for less educated people

  Business Ideas in Hindi कोई भी अनपढ़ या कम पढ़ा लिखा व्यक्ति इन 5 व्यवसायों को शुरू करके कर सकता है अच्छी खासी मोटी  दुनिया में कई ऐसे लोग होते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण वे शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते हैं. वैसे तो ये पहले के समय में ज्यादा होता था, किन्तु आज भी बहुत से लोग हैं जो शिक्षा प्राप्त करने में असमर्थ हैं. इसका मुख्य कारण पैसे की कमी के साथ – साथ साधन की कमी और कम पढ़े लिखे लोगों वाली पृष्ठभूमि का होना है. ये खास तौर पर छोटे शहर या गांव में रहने वाले लोग होते हैं, जोकि अनपढ़ रह जाते हैं. यदि आप ऐसे लोगों को जानते हैं जोकि अनपढ़ है या कम पढ़े लिखे है, और इस वजह से उनके पास कोई कमाई का साधन नहीं है. तो उन्हें आप कुछ पैसे कमाने वाले बिज़नेस के आइडियाज दे सकते हैं. जिसे वे अपनी अजीविका का साधन बना सकें. ऐसे लोगों के लिए कुछ बिज़नेस आइडियाज हम भी यहाँ दे रहे हैं, इसे अंत तक पढ़िये.  कम पढ़े लिखे लोगों के लिए व्यवसाय के आइडियाज ( Less Educated Business Ideas ) कम पढ़ें लिखे लोग या फिर जो अनपढ़ हैं उन्हें आप निम्नलिखित व्यवसाय शुरू करने की टिप्स दे सकते हैं.

Father of New Clear Energy biography Dr.HOMEO JAHANGIR BHABHA



                        " Dr.HOMEO JAHANGEER BHABHA"

          

"मेरी सफलता इस  बात पर निर्भर नहीं  करती कि कोई मेरे बारे मे क्या सोचेगा ,  मेरी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि मैं क्या कर सकता हूँ  ।।                                                                                                


  Birth date: 30 October 1909                     
Deth 24 Janauray1966 Mont blanc 


Dr Homeo j Bhabha     


      भारत दुनिया के उन 9 देशों में से एक है जिसके पास न्यूक्लियर पावर है।                                                     
  भारत में न्यूक्लियर पावर के रिजल्ट के नाम से जानते हैं इनका नाम तो आपने सुना ही होगा।आज हम बात करेंगे  प्रसिद्ध वैज्ञानिक डाक्टर होमी जहांगीर भाभा की उनकी उपलब्धियों और भारत के परमाणु विकास में उनके योगदान की जिन्हें फादर ऑफ इंडियन न्यूक्लियर प्रोग्राम यानि भारतीय परमाणु कार्यक्रम का जनक भी कहा जाता है।
Biography Homeo Johngir Bhabha। न्यू क्लियर फादर भाभा की जीवनी
Fother of new Clear Energy Dr Homi Jehangir Bhabha


जिन्होने दो प्रसिद्ध शोध संस्थानों की नींव 1945मे रखी है-          (T.I.F.R)टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च और दूसरी है।जिसका नाम बदलकर ऑटोमिक रिसर्च सेंटर रख दिया गया था तो चलिए दोस्तों आज उनके के बारे में शुरू से जानते हैं। होमी जहाँगीर भाभा का जन्म 30 अक्टूबर 1909 को मुंबई में पारसी परिवार में हुआ था उनका परिवार बहुत ही  शिक्षित और धनी था।

                       


         उनके पिता  जहांगीरपुर होमरस जी भाभा  अंग्रेजों के जमाने के बहुत ही नामी वकील थे। उनकी शुरुआती पढाई(Cathedral and Jon Conan)  कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से हुई और बाद मे (Royal Institute of Sciece)से B.s.c करने के बाद।
उनके पिता और उनके रिश्तेदार दोराबजी टाटा जो उस समय के बहुत बड़े उद्योगपति थे।
        दोनों लोग मिलकर उनके ऊपर        कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (Kambrij University of London) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने का दबाव बनाने लगे जिससे कि वह वापस आकर टाटा स्टील में काम कर सके दोस्तों क्योंकि उस समय कैंब्रिज यूनिवर्सिटी कई नए आविष्कारों का केंद्र बन चुकी थी।
होमी जहाँगीर भाभा कॉल डिराक से काफी प्रभावित हुए थे। आप हम जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि पार्टी रेट में पहली बार एंटीमैटर के होने की संभावना जताई थी उनके योगदान के लिए उन्हें नोबेल प्राइज मिला था। इन्ही से प्रभावित होकर भाभा को भी फिजिक्स आफ न्यू क्लियर एनर्जी में इन्टेस्ट आने लगा।सन् 1933मे एक महत्वपूर्ण पेपर प्रकाशित किया जिससे उन्हें डाक्टरेट की डिग्री मिल गयी।इसी पेपर के कारण उन्हें (Issac Newton Studentship) भी जीत गए इस रिसर्च से उनकी एक साइंटिस्ट के रूप में पहचान बना ली ।


       Bhaba ka India me vapas aana

सन् 1939मे  में वह छुट्टी पर भारत वापस आये उसी समय विश्व युद्ध भी शुरू हो गया था । इन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय को वापस न जाने का फैसला किया।
इन्होंने( India Research of Sciece)में  काम करने का फैसला किया उस समय इसके हेड प्रसिद्ध वैज्ञानिक  C.V.Raman थे ।
इन्होंने "दोराब जी टाटा " से रिसर्च के लिए बात की इसके लिए टाटा जी से फन्डिग मिल गयी जिससे इन्होंने Cosmic Ray Research यूनिट बनाई।इसमें काम करते समय इन्हें यह एहसास हुआ कि भारत में कोई ऐसा रिसर्च यूनिट नहीं है जहाँ न्यू क्लियर फिजिक्स के क्षेत्र में रिसर्च की जा सके ।वह यह भी समझ गये थे कि । भारत में कई वैज्ञानिक इस क्षेत्र में  अलग-अलग काम कर रहे हैं ।इन सभी के अलग-अलग काम करने की वजह से कोई बड़ा आविष्कार नहीं हो पा रहा है ।अगर कोई ऐसीजगह हो जहाँ सभी वैज्ञानिक एक साथ मिलकर काम कर सकें और वहां सभी सुविधाएं उपलब्ध हो। तो जरूर कोई बड़ा आविष्कार हो सकता है।
      इसी संबंध में इन्होंने दोराब जी टाटा को एक पत्र लिखा और एक इन्स्टीट्यूट बनाने का प्रपोजल रखा उनका ये प्रपोजल स्वीकार कर लिया गया।सन् 1945 मे( टी आई एफ आर ) टाटा इन्स्टीट्यूट ऑफ फन्डामेन्टल रिसर्च सेंटर की नीव रखी। फिर उन्हें लगा कि T.I.F.R. मे पूरी तरह रिसर्च नहीं हो पाएगी तब उन्होंने भारतीय गवर्मेंट एक नई लेबोरेट्री बनाने की मांग की उसे स्वीकार कर लिया गया बाम्बे में 1200 एकड़ जमीन एलाट कर दी गई सन् 1954 मे( A.E.E.T.) एटामिक एनर्जी एसटाब्लेस्ट ट्राम्बे में काम में काम शुरू हो गया। उनका दुनिया भर के वैज्ञानिको से परिचय था।जिन्हें वह भारत में बुलाते थे और भारतीय वैज्ञानिकों से मिलवाते थे जिससे उन्हें कुछ सीखने को मिले और प्रोत्साहन मिले। इन्होंने  परमाणु हथियारों पर रिसर्च करना शुरू कर दिया।
       भारत की आजादी के बाद 1948 में नेहरु जी ने उन्हें  भारत के परमाणु कार्यक्रम का डायरेक्टर बना दिया और देश के लिए परमाणु हथियार विकसित करने की जिम्मेदारी उन्हें ऑफिशियली सौप दी उनके द्वारा किया गया एक महत्वपूर्ण शोध भाभा स्केटरिग  आज पूरी दुनिया में पढ़ाया जाता है।
सन् 1954 मे  उन्हें भारत सरकार द्वारा पदम् भूषण से सम्मानित किया गया। उन्होंने उस समय के एक बड़े  साइंटिस्ट विक्रम साराभाई की स्पेस रिसर्च  के लिए बहुत  सहयोग दिया था।24जनवरी सन् 1966मे एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गयी। हालांकि उनकी मृत्यु को C.I.F  एजेंसी की साजिश भी कहा जाता है जिससे कि भारत में बढ़ते परमाणु शोध को रोका जा सकते हैं उनकी मृत्यु के बाद A.E.E.T का नाम
बदलकर भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर दिया गया
परमाणु विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें
हमेशा याद किया जाता रहेगा।

         उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ


        वर्ष 1941 में इन्हें मात्र 31 वर्ष की आयु में  रॉयल सोसाइटी का सदस्य चुना गया ।जो एक बड़ी उपलब्धि थी बाद में 944 में प्रोफ़ेसर बना दिया गया ।1948 में डॉक्टर भाभा में भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना की और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया ।मूर्तिकला चित्रकला और नृत्य में गहन रुचि होने के कारण चित्रकार एमएफ हुसैन की पहली प्रदर्शनी का मुंबई में डॉक्टर भाभा ने  उद्घाटन किया। सीवी रमन इन्हें भारत का लियोनार्डो डा विंची कहा करते थे । सन 1955 में जिनेवा  में  होने वाले संयुक्त राज्य  द्वारा आयोजित शांतिपूर्ण कार्यक्रमों में उपयोग के लिए पहले सम्मेलन में डॉक्टर होमी भाभा को सभापति बनाया गया।
 भारत में इस महान वैज्ञानिक का निधन 24 जनवरी सन 1966 में एक विमान दुर्घटना में  निधन हो गया सत्य है ऐसा महान वैज्ञानिक अगर कुछ समय और रहता तो भारत को और बहुत कुछ दे जाता भारतीय और विदेशों से कई मान द डिग्री प्राप्त हुई इनके इनको 5 बार भौतिकी में नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया ।
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