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Business idea for low investment,Business ideas for less educated people

Business Ideas in Hindi
कोई भी अनपढ़ या कम पढ़ा लिखा व्यक्ति इन 5 व्यवसायों को शुरू करके कर सकता है अच्छी खासी मोटी 
दुनिया में कई ऐसे लोग होते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण वे शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते हैं. वैसे तो ये पहले के समय में ज्यादा होता था, किन्तु आज भी बहुत से लोग हैं जो शिक्षा प्राप्त करने में असमर्थ हैं. इसका मुख्य कारण पैसे की कमी के साथ – साथ साधन की कमी और कम पढ़े लिखे लोगों वाली पृष्ठभूमि का होना है. ये खास तौर पर छोटे शहर या गांव में रहने वाले लोग होते हैं, जोकि अनपढ़ रह जाते हैं. यदि आप ऐसे लोगों को जानते हैं जोकि अनपढ़ है या कम पढ़े लिखे है, और इस वजह से उनके पास कोई कमाई का साधन नहीं है. तो उन्हें आप कुछ पैसे कमाने वाले बिज़नेस के आइडियाज दे सकते हैं. जिसे वे अपनी अजीविका का साधन बना सकें. ऐसे लोगों के लिए कुछ बिज़नेस आइडियाज हम भी यहाँ दे रहे हैं, इसे अंत तक पढ़िये. 
कम पढ़े लिखे लोगों के लिए व्यवसाय के आइडियाज (Less Educated Business Ideas)
कम पढ़ें लिखे लोग या फिर जो अनपढ़ हैं उन्हें आप निम्नलिखित व्यवसाय शुरू करने की टिप्स दे सकते हैं. और यदि आ…

Biography of lord Buddha,Buddha quots?



गौतम बुद्ध का त्याग Sacrifice of Gautama Buddha

Biography Lord Buddha


Birth of Buddha?    जन्म तिथि 563 ई० जन्म स्थान

लुंबिनी, नेपाल 

 वास्तविक नाम      
सिद्धार्थ वशिष्ठ उपनाम गौतम बुद्ध, सिद्धार्थ गौतम, शाक्या मुनि, बुद्धाव्यवसायबौद्ध धर्म के संस्थापक
व्यक्तिगत जीवन

Death of Buddha?




मृत्यु तिथि 483 ई०मृत्यु स्थलकुशीनगर, भारतआयु (मृत्यु के समय)
80 वर्ष
गृह नगरलुंबिनी, नेपालधर्मबौद्ध धर्म जाति क्षत्रिय (शाक्य)परिवार 



Who was lord Buddha father?

पिता - शुद्धोधन
माता - मायादेवी, महाप्रजावती उर्फ़ गौतमी (सौतेली माँ)
प्रेम संबन्ध एवं अन्य जानकारियां
वैवाहिक स्थिति
विवाहित पत्नी राजकुमारी यशोधरा

29 साल की उम्र में, सिद्धार्थ ने अपने महल 

और परिवार को, एक सन्यासी जीवन जीने के लिए त्याग दिया, उन्होंने सोचा कि गृह त्याग  का जीवन जीने से, उन्हें वहजवाब मिलेगा जो वह तलाश कर रहे थे। अगले छह सालों तक उन्होंने और अधिक तपस्वी जीवन जिया। उस दौरान उन्होंने बहुत कम खाना खाया और उपवास करने के कारण शरीर बहुत ही दुर्बल और कमजोर हो गया था।


इन वर्षों में उन्होंने पांच अनुयायी भी मिले , जिनके साथ उन्होंने कठोर तपस्या का अभ्यास किया। इस तरह के एक सरल जीवन जीने के बावजूद और खुद को महान

शारीरिक यातनाओं के अधीन करने के बावजूद, सिद्धार्थ वह जवाब पाने में असफल थे जिन सवालों के जवाब  (संसार के दुखों का कारण) वह ढूंढ रहे थे। कई सालों  तक खुद को भूखा रखने के बाद एक बार

उन्होने एक युवा लड़की से खीर का कटोरा स्वीकार कर लिया।इस भोजन को प्राप्त करने के बाद उन्होंने महसूस किया कि इस तरह कठिन  भौतिक बाधाओं में रहने से वह अपने आध्यात्मिक लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पायेंगे और

एक दिन उनके पास से कुछ औरतें निकली,जो कि कोई गाना गा रही थी कि वीणा के तार ठीले न छोड़े और इतनें भी टाइट भी नहीं करना कि टूट ही जायें उनकी समझ में यह बात बैठ गई कि शरीर को इतना कष्ट देने से कोई हल नहीं निकलने वाला है। इसी वजह से उन्होंने उस लड़की के हाथ से खीर लिया ।

हालांकि, उन्होंने अपने अनुयायियों को यह विश्वास दिलाया कि उन्होंने अपनी आधायात्मिक खोज को छोड़ दिया इसके बाद उन्होंने पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान करना शुरू कर दिया और

स्वयं को वादा किया कि वह तब तक वहाँ से नहीं हिलेंगे जब तक उसे ज्ञान प्राप्त न हो जाए। उन्होंने कई दिनों तक ध्यान किया और अपने पूरे जीवन

को और शुरूआती जीवन को अपने विचारों में देखा।49 दिनों के मनन करने के बाद, आखिरकार वह उन दुखों के सवालों के जवाब का एहसास हुआ जो वह कई वर्षों से ढूंढ रहे थे। उन्होंने शुद्ध ज्ञान प्राप्त

किया, और ज्ञान के उस क्षण में, सिद्धार्थ गौतम बुद्ध बन गए (“वह जो जागृत है”)।

अपने आत्मज्ञान के समय उन्होंने पीड़ा में रहने के कारण की पूर्णरूप से अंतर्दृष्टि प्राप्त की , और इसे समाप्त करने के लिए उन्होंने आवश्यक कदम उठाये उन्होंने इन चरणों

कहते यह है कि शुरू में बुद्ध दूसरों के लिए अपने ज्ञान का प्रसार नहीं करना चाहते थे, क्योंकि उन्हें शक था कि क्या आम लोगों उनकी शिक्षाओं को समझ पायेंगे।

लेकिन तब देवताओं के राजा, ब्रह्मा ने, बुद्ध को सिखाने के लिए प्रेरित किया, और बुद्धा ने ऐसा ही किया। वह इिसिपतना के डीयर पार्क में गये, जहां उन्होंने उनपांच साथियों को पाया जो पहले उन्हें छोड़ चुके थे।उन्होंने उन्हें अपना पहला धर्मोपदेश दिया और जो लोग वहां इकट्ठे हुए थे उनके सामने भी प्रचार किया। अपने उपदेश में, उन्होंने चार अनमोल सत्यों पर ध्यान दिया –उन्होंने आगे सबसे पहले मार्ग को समझाया, इस मार्ग मे उन्होंने तृष्णा को सभी दुखों का कारण बताया।

 उन्होंने सिखाया कि “सत्य” के आठ चौड़े पथ के माध्यम से मध्यपथ में सही दृष्टिकोण, सही मान, सही भाषण, सही कार्रवाई, सही आजीविका, और दूसरों के बीच सही सचेतन शामिल है। गौतम बुद्ध ने अपने पूरे जीवन को यात्रा में बिताया,

उन्होंने सज्जन से अपराधियों तक लोगों की एक विविध श्रृंखला को पढ़ाया।

प्रमुख कार्य और बौद्ध धर्म Some Major Works by Buddha and Buddha Dharma

बौद्ध धर्म में गौतम बुद्ध एक प्रमुख व्यक्ति हैं। बौद्ध धर्म का धर्म अपनी शिक्षाओं में अपनी नींव रखता है; उन्होंने चार नोबल सत्य दिए जो बौद्ध धर्म की बुनियादी

अभिविन्यास को व्यक्त करते थे और बौद्ध विचारों की एक संकल्पनात्मक रूपरेखा प्रदान करते थे, और पीड़ा को समाप्त करने के लिए “बौद्ध धर्म के आठ गुना पथ” का प्रस्ताव

गौतम बुद्ध का निजी जीवन Buddha Personl Life

जब सिद्धार्थ 16 साल के थे, तो उनके पिता ने यशोधरा नाम की लड़की के साथ उनकी शादी का आयोजन किया। इस शादी के बाद एक बेटा,

राहुल को जन्म दिया। उन्होंने अंततः अपने परिवार का त्याग किया, जब उन्होंने एक साधक के रूप में आध्यात्मिक यात्रा शुरू की थी। 


गौतम बु द्ध की मृत्यु (निधन) Death of Gautam Buddha

उनकी पत्नी एक नन बन गई थी, जबकि उनके बेटे सात वर्ष की उम्र में नौसिखिए भिक्षु बन गए थे और अपने पूरा जीवन को अपने पिता के साथ बिताया।

जब बुद्ध ने बताया क्‍या होता है मृत्यु के बाद?


भगवान बुद्ध से उनके शिष्‍य अकसर मृत्‍यु को लेकर तरह-तरह के सवाल पूछा करते थे. बुद्ध हमेशा इस सवाल को टाल जाते थे. एक बार उनके एक शिष्‍य ने इस सवाल का जवाब जानने की ठान ली. उसने पहली बार सवाल किया तो बुद्ध हंसकर टाल गए. उसने एक बार फिर पूछा तो उसे अनदेखा करते हुए बुद्ध दूसरे शिष्‍य की ओर मुखातिब हो गए. लेकिन वह कहां मानने वाला था. उसने एक बार फिर पूछा. तब बुद्ध ने उसे जीवन और मृत्‍यु का रहस्‍य समझाया.


तीर लगे तो पहले निकालोगे या यह पता करोगे कि कहां से आयाशिष्य ने जब बुद्ध से सवाल पूछा कि मनुष्य की मृत्यु के बाद क्या होता है तो उन्होंने कोई जवाब देने की बजाए उससे ही सवाल कर दिया. उन्होंने शिष्य से पूछा कि मान लो तुम्हारे शरीर में कहीं से तीर आकर लग जाए तो सबसे पहले तुम क्या करोगे? शरीर से तीर निकालोगे या यह पता करोगे कि तीर कहां से आया और किसे मारने के लिए छोड़ा गया था. शिष्य ने कहा, 'भगवन, सबसे पहले मैं उस तीर को शरीर से निकालूंगा और घाव पर मरहम पट्टी करूंगा.'जीवन में आए दुखों के निवारण का उपाय सबसे पहले जरूरी


बुद्ध ने शिष्य की ओर मुस्कुरा कर देखा और बोले, 'बिल्कुल सही जवाब है तुम्हारा. हमें जीवन मिला है. जीने के लिए हमें कितना संघर्ष करना पड़ता है. जीवन में इतना दुख है. हमें अपनी ऊर्जा उन दुखों के निवारण में खर्च करनी चाहिए. ना कि यह सोच कर अपना वर्तमान और भविष्य खराब करना चाहिए कि मरने के बाद क्या होगा.' शिष्य भगवान बुद्ध की बात समझ चुका था. उसे अपने सवाल का 
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